बृहत् पाराशर होरा में दशाफल से लेकर सूक्ष्मदशा तक के फल है l सर्वार्थ चिंतामणि में अन्तर्दशा तक ही विचार किया गया है पर इस ग्रन्थ में उच्चांश, उच्च, मूलत्रिकोण मित्र, सम, शत्रु राशि इत्यादि में ग्रह की भाव स्थिति के अनुसार ग्रहो के फल तो बताए गए ही है, नवांश द्रेष्काण, षष्ट्यंश, स्थितियों द्वारा उतपन्न फलों पर भी विचार किया गया है l विभिन्न वर्गों में जहाँ षष्ट्यंश को महत्व दिया गया है वही अशुभ वर्ग से होने वाले अशुभ फलों के, शुभ ग्रहो की दृष्टि होने पर अशुभता का पूर्ण शमन या कमी होना भी बताया गया है l कुछ संकलित विषय वस्तुओ के बारे में महत्वपूर्ण टिप्पणियां दी गई है
१. ग्रहो की उच्च राशियों का रहस्य
२. जन्म लग्न शोधन की कर्वे पद्धति
३. पुष्कर नवांश की महत्ता
४. आजीवन धन, मान तथा वाहन सुख
५. संतानहीनता पर जातक तत्व का सन्दर्भ
६. पत्नी /पति का लग्न जानने की विधि
७. उपास्य देवता या देव
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