मंदिर और आत्मा की शुद्धि- काशी विश्वनाथ- भाग -१

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हमारे पूर्वज इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि ईश्वर हर जगह है लेकिन फिर भी उन्होंने देशभर में कई खूबसूरत मंदिरों का निर्माण किया। इन मंदिरों का वास्तु और निर्माण अपने आप में चमत्कार है कि कैसे आधुनिक उपकरणों के बिना भी वे इनके निर्माण में इतनी सटीकता हासिल

करने में सक्षम थे। यह भी ज़ाहिर है कि इन मुख्य मंदिरों के निर्माण का उद्देश्य लोगों के ग्रहों से संबंधित दोष दूर करना था। हमारे ऋषियों ने न केवल देवताओं को ध्यान में रखा बल्कि शरीर के दोषों को संतुलित करने के लिए भौगोलिक महत्व को भी ध्यान में रखा।

कुंडलियों में विभिन्न बीमारियों को संतुलित करने के लिए कई उपचारात्मक उपायों में विभिन्न मंदिरों में जाने का सुझाव दिया जाता है, ताकि मंदिर में उच्च ऊर्जा स्रोतों के कंपन से विभिन्न कठिनाइयों को संतुलित किया जा सके। -क्योंकि मंदिर का गर्भ गृह रोशनी के बिना पूरी तरह से अंधेरा में रहता है और साथ ही वहां कोई वेंटिलेशन भी नहीं होता,  इसलिए निरंतर कई हजार वर्षों में निर्मित ऊर्जा को मंत्रोच्चार करने से जातकों को चार्ट में मौजूद दोषों को दूर करने में मदद मिलती है।

कुछ मंदिर होते हैं, जहां जाने से कुछ घटनाएं हमारे साथ होने लगती हैं और ये सामान्य नहीं होती हैं और प्रकृति में बहुत ही कर्मशील होती हैं- काशी विश्वनाथ का एक उदाहरण लेते है- यह मंदिर जो मानव सभ्यता की शुरुआत का प्रतीक है, धनु जीव के द्वारा भी दर्शाया जाता है। इसलिए जब भी आपको अपने मूल, बच्चों,स्वास्थ्य से संबंधित समस्या या फिर जातक उच्च ज्ञान के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर जाना चाहिए। लेकिन मान लीजिए कि कुछ लोगों के धनु राशि मंगल और राहु के साथ पीड़ित है – और क्योंकि धनु भी युद्ध का एक संकेत है जहां आपको सिद्धांतों के लिए लड़ना पड़ता है और अपने आप को बलिदान करके धर्म की रक्षा करनी है। आप धनु से दर्शाय जाने वाले लोगों को देखिए, जैसे कि गुरु और पिता दोनों अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत कुछ बलिदान करते हैं। साथ ही इस राशी का मंगल और राहु जैसी हानिकारक राशि के साथ पीड़ित होना यह दर्शाता है कि जातक पिछले जन्म में किसी चीज का बचाव करते हुए मर गया था और उसे शारीरिक चोटें आई थी और इसलिए इस जन्म में भी आप अक्सर शारीरिक नुकसान भी देखेंगे। साथ ही इस जीवन में आप यह भी देखेंगे कि जहां भई जातक की चार्ट में धनु राशि है, उसे उस घर से संबंधित बहुत त्याग करना पड़ेगा और वही प्रतिरूप दोहराना शुरू होगा। इसलिए जब भी यह जातक काशी की ओर अपनी यात्रा शुरू करेगा – बाधाएँ आने लगेंगी, क्योंकि जातक धनु राशि के शक्ति स्रोत की ओर बढ़ रहा है, शारीरिक झगड़े या दुर्घटनाएं दिखाई देंगी या स्वास्थ्य में गिरावट आएगी लेकिन जातक को इन बाधाओं से पीछे नहीं हटना चाहिए। दूसरी बात यह है कि जब भी आप किसी धार्मिक स्थान पर जाने के लिए यात्रा की योजना बनाते हैं- कृपया सुनिश्चित करें कि आप अपना भोजन अनुशासन बनाए रखें और यात्रा के दौरान अपने मन को प्रार्थना में रखें क्योंकि हर कदम पर आप मंदिर की ओर बढ़ेंगे – इससे नकारात्मक कर्म दूर हो जाते हैं।

एक संत कहते हैं कि गुरु के आश्रम में जाने के लिए आप जो भी कदम उठाते हैं, वह आपके जीवन से बहुत सारे बुरे कर्मों को दूर कर देता है, इसलिए सुनिश्चित करें कि आप ऐसा व्यवहार करें जैसे आप एक आध्यात्मिक यात्रा पर हैं,  बजाय इसके कि आप इयर पॉड्स लगाकर और संगीत सुनें।

केवल उस घटना पर ध्यान दें जो यात्रा के दौरान आपके साथ होती है और देखें कि यह आपके चार्ट से कैसे संबंधित है – एक बार जब आप मंदिर पहुंच जाते हैं तो हमेशा मंदिर क्षेत्र में और उसके आसपास कुछ समय के लिए बैठें, कोई तामसिक या राजसिक भोजन न करें – यदि संभव हो तो उपवास रखें, दिन-दर्शन के बाद आपको एहसास होगा कि जीवन में कुछ चीजें घटित होंगी जिन्हें कोई नहीं समझा सकता है और महाकाल के आशीर्वाद से विभिन्न कर्म गांठें कैसे खुलने लगती हैं। भगवान शिव आपको पिछले जन्म के अपने ऋणों को चुकाने का अवसर प्रदान करते हैं। जैसा कि धनु भी जीव का संकेत है और पिछले जन्म में जीव की हत्या को दर्शाता है और यह केवल काशी की भूमि है जहां वीरभद्र ने हत्या के अभिशाप से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त किया था, इसलिए चार्ट में पीड़ित धनु एक अच्छा संकेत नहीं है – कर्क, वृश्चिक और वृष की तरह यह राशि स्वाभाविक रूप से लग्न से 6/8/12 में है- इन लग्नों के लिए काशी का दौरा और कहानियां अधिक प्रमुख साबित होंगी।

मंदिर का स्थान भारत के केंद्र में है – इस क्षेत्र में तापमान कभी भी अत्यधिक ठंडा या अत्यधिक गर्म नहीं होता है क्योंकि जीव को जीवित रहना होता है – यह ये भी दर्शाता है कि यह वह स्थान है जो शरीर में वात/पित्त/कफ और आपकी किसी भी बीमारी को संतुलित करता है। यहां तक ​​कि जब लोगों को वरिष्ठों और पिता से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा हो, तब भी उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर जाना चाहिए।

    2 Comments

  1. Anish Tiwari
    August 3, 2021
    Reply

    प्रणाम
    बहुत-बहुत धन्यवाद
    कर्क लग्न के जातक के लिए धनु राशि 6 घर में आएगा तथा वृष लग्न के जाति के लिए धनु राशि 8 आठवें घर में आएगा लेकिन वृश्चिक लग्न के लिए धनु राशि तो 2 nd house पर आएगा
    6/8/12 house पर नहीं आएगा
    कृपया इसे स्पष्ट करें🙏

    • Rishi
      September 2, 2021
      Reply

      Unse misprint hua he , whan pr wo Capricorn khna chahte he

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